कई राक्षसों के बीच दब गई है मेरी इच्छा और आकांक्षा की कठपुतली मेरी जरूरत की डोर उसे जिधर ले जाता है जाना ही पड़ता है कभी कभी राक्षसों के बीच से भाग जाती है कठपुतली अपनी दुनियां में अपनी सभ्यता में मुर्दे ने आंखें खोल दी ऐसे शब्द के प्रभाव से चमक गया लुगदी साहित्य वर्दी वाला गुंडा वो (शा×ला)खद्दर वाला मेरा जमीर धिक्कारता है और मैं दौर के पिछली पंक्ति में खड़ा रह जाता हूँ फिर से दब जाती है राक्षसों के बीच मेरी कठपुतली एक रंगीन समारोह में एक अभिनेता सदी का सबसे बड़ा अभिनेता बन जाता है मेरी कठपुतली फिर से एक बार हलचल करने लगती है आदमी नहीं तो अभिनेता जरूर बन सकता हूँ कुछ दिन बाद मेरी कठपुतली एक देसभक्त के हाथों बिक जाती है जैसे गाय कभी कभी कसाई के हाथों बिक जाती है कठपुतली धम्म... से गिरती है जमीन पर अपनी खुद की जमीन पर जहां से कोई भी रास्ता उसके लिए कहीं नहीं जाती मेरी कठपुतली फिर से बंध जाती है जरुरत की डोर से कई राक्षसों के बीच एक लाश बन कर रह जाती है मेरी कठपुतली
स्त्री..! रहस्यों से भरी हुई एक ऐसी सुंदरतम प्राणी है जो सचमुच सम्मान का हकदार है।शक्ति उपासना का असली अर्थ शक्ति का सम्मान ही है।और कन्या उत्थान ही जीवन का आधार भी। मेरे ब्लॉग में अधिकांशतः इसी तरह की रचनाएँ आपको मिलेंगे। प्रकृति की यह आश्चर्यजनक एवं संतुलित रचना के नष्ट होने से बचाने का सतत प्रयास करना चाहिए। यही पुरुष का धर्म है।