लाल रोशनी में नहाया धन को ही इमान बनाया अलग तरह के इस कारोबार में गंदे सिक्के के सैकड़ों साफ का हजार स्टंडर लाखों में बिकती हैं बाजार में.. जो जितना पार्दरशी कीमत उतनी ही अधिक ढंके हुये को कौन पूछता बाजार में.. दुनिया बदली सबकुछ बदला कुछ नहीं बदला बाजार में.. जगह जिस की जितनी संकरी कीमत उतनी ही कम बाजार में.. शेयरों के जमाने में कभी कभी ही असली चीजों की कीमत ऊँची लगती है बाजार में.. जो दुकान जितनी बड़ी है कीमत उतनी ही ऊंची सिक्के जितने घटिया होते प्रदर्शन उतना ही बढियां ठगे जाते हैं ग्राहक बाजार में.. अठन्नी और रुपये की कीमत हर कोई जानते हैं फिर भी अपने अपने अंदाज में पेश हुए सिक्के की कीमत अपने अपने अंदाज में बाजार में.. सच अंदाज की ही कीमत है बाजार में बहूत कुछ देकर कुछ भी प्राप्त नहीं होता बाजार में...!
स्त्री..! रहस्यों से भरी हुई एक ऐसी सुंदरतम प्राणी है जो सचमुच सम्मान का हकदार है।शक्ति उपासना का असली अर्थ शक्ति का सम्मान ही है।और कन्या उत्थान ही जीवन का आधार भी। मेरे ब्लॉग में अधिकांशतः इसी तरह की रचनाएँ आपको मिलेंगे। प्रकृति की यह आश्चर्यजनक एवं संतुलित रचना के नष्ट होने से बचाने का सतत प्रयास करना चाहिए। यही पुरुष का धर्म है।