ब्यक्ति बैठ जाता है थक कर कभी कभी पंछी लौट आते उड़ना छोड़ कभी कभी मशीन बंद कर देती काम करना कभी कभी हवा थोड़ी भी नहीं बहती कभी कभी सब कुछ शिथिल हो जाता है कभी कभी यह सब तूफान आने से पहले की खामोशी है असफलता किसी भारी सफलता की पूर्व सूचना असफलता से अ हटा दो अंतर इतना ही होता है कभी कभी
स्त्री..! रहस्यों से भरी हुई एक ऐसी सुंदरतम प्राणी है जो सचमुच सम्मान का हकदार है।शक्ति उपासना का असली अर्थ शक्ति का सम्मान ही है।और कन्या उत्थान ही जीवन का आधार भी। मेरे ब्लॉग में अधिकांशतः इसी तरह की रचनाएँ आपको मिलेंगे। प्रकृति की यह आश्चर्यजनक एवं संतुलित रचना के नष्ट होने से बचाने का सतत प्रयास करना चाहिए। यही पुरुष का धर्म है।