एक किताब अच्छी और खूबसूरत जो मुझे बहुत पसंद थी जिसे पढ़ा करता था दिन रात उस किताब के अठारह अध्यायों में ग़्यारह पहाड़ी और सात समंदर जो मेरी जिंदगी मेरी खुशियों और शांति के प्रतीक एवं बुनियाद थी जिसे मैं खूब महसूस किया हूं यूँ कहिए कि उस किताब से मुझे प्यार हो गया था एक बार एक भयावह तूफान के चपेट में लाल चमचमाते रेशमी कपड़ों में लिपटी वही किताब जब नंगी हुई थी हो रही थी मैं देख चुका हूं मुझे खूब याद है उन अठारह अध्यायों को झकझोरता हुआ तूफान फरफराते उसके पृष्ठ थरथराते उसके सर्वान्न बस मैं भी कुछ नहीं कर सका सिर्फ देखता रहा ऐसे ही कुछ और तूफानों के बाद वह किताब वहां नहीं देखा था आज जब उस किताब को एक रंगीन महल और माहौल में देख रहा हूं जहां मैं भी रंगीन होने गया था उस किताब पर कुछ और रंग चढ़ा था उसके जिल्द जितने रंगीन थे उसके पृष्ठ उतनें ही भयानक अस्त-वस्त बदसूरत जिसके शब्द ... पढ़े नहीं जा रहे थे बीच बीच से गायब और बाकी बचे फटे पृष्ठों को अब कोई नहीं संभाल सकता था वह खुली किताब जिसे हर कोई देख सकता था मगर उसके धुंधले शब्द कोई नहीं प...
स्त्री..! रहस्यों से भरी हुई एक ऐसी सुंदरतम प्राणी है जो सचमुच सम्मान का हकदार है।शक्ति उपासना का असली अर्थ शक्ति का सम्मान ही है।और कन्या उत्थान ही जीवन का आधार भी। मेरे ब्लॉग में अधिकांशतः इसी तरह की रचनाएँ आपको मिलेंगे। प्रकृति की यह आश्चर्यजनक एवं संतुलित रचना के नष्ट होने से बचाने का सतत प्रयास करना चाहिए। यही पुरुष का धर्म है।