बड़ी होती
लड़कीयों की
फिक्र करती
मम्मी के
सर ,नाक , छाती
और कमर से
फिसल कर
पता नहीं चला
कब हया की पानी
घुटने पर पहूंच गई
कपड़े
जो पिछले साल
सिलवा दी थी
छोटी होकर
पता नहीं चला
कब ...?
घुटने पार कर गई
साप की जगह
माल ने
जब से ली है
पता भी नहीं चला
मम्मी कब?
माम बन गई
बेटी कुछ भी करे
बोल नही सकती
अरे माम भी
हमाम के
जाल में फंस गयीं
बेटी की बहन बनकर
टेलर को दी टेंशन
माँ बेटी के कपड़े में
किसकी कौन
अंग दिखाए
जंघा किसकी
पीठ किसकी
बिल्कुल पशोपेश में..
फिर पेशेवरों की तरह
दोनों से माल खाये
दोनों के थप्पड़ खाये
फिर एक साथ
दोनों के बदन दिखाए
एक दिन माँ बेटी
दोनों फंस गयीं
एक ही सिनेमा हॉल में
दोनों भाई
वह भी एक ही हाल में
सरकार अदालत
कुछ भी आ जाए
इसका अब तक
कोई पता नहीं चला
इन बीते साल मे
पुरुषों को तो
बिना कुछ सोचे समझे
ऐसे ही
कुछ भी
बोलने की आदत है
सच. ..
बेफिक्र हो गई मम्मी?
लड़कीयों की
फिक्र करती
मम्मी के
सर ,नाक , छाती
और कमर से
फिसल कर
पता नहीं चला
कब हया की पानी
घुटने पर पहूंच गई
कपड़े
जो पिछले साल
सिलवा दी थी
छोटी होकर
पता नहीं चला
कब ...?
घुटने पार कर गई
साप की जगह
माल ने
जब से ली है
पता भी नहीं चला
मम्मी कब?
माम बन गई
बेटी कुछ भी करे
बोल नही सकती
अरे माम भी
हमाम के
जाल में फंस गयीं
बेटी की बहन बनकर
टेलर को दी टेंशन
माँ बेटी के कपड़े में
किसकी कौन
अंग दिखाए
जंघा किसकी
पीठ किसकी
बिल्कुल पशोपेश में..
फिर पेशेवरों की तरह
दोनों से माल खाये
दोनों के थप्पड़ खाये
फिर एक साथ
दोनों के बदन दिखाए
एक दिन माँ बेटी
दोनों फंस गयीं
एक ही सिनेमा हॉल में
दोनों भाई
वह भी एक ही हाल में
सरकार अदालत
कुछ भी आ जाए
इसका अब तक
कोई पता नहीं चला
इन बीते साल मे
पुरुषों को तो
बिना कुछ सोचे समझे
ऐसे ही
कुछ भी
बोलने की आदत है
सच. ..
बेफिक्र हो गई मम्मी?
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