वैश्विक महामारी से
डर कर
फुटपाथ पर
लॉक डाउन में
भूख से बिलबिलाता
गरीब एवं गरीब के बच्चे
पांच रूपए का चना
ना तो खुद चबाते
और ना ही बच्चे मांगते
उसकी माँ अपनी गठरी में
संजोग कर रखते हुए
और....खराब समयआने का
इंतज़ार करते करते
यही सोचकर सो जाते हैं
कि कोई ना कोई जरूर
आकर उन्हें जगाएंगे
खाने का एक पैकेट दे जाएंगे
मगर .....
ना तो उनके पास
कोई प्रश्न होता
और ना ही उनके ऊत्तर
पुलिस के डंडे खाने से
जब वह जागते हैं तो
उनके प्रश्नों का जबाब ?
अपने आंसूओं से दे डालते हैं
क्योंकि
वह व्यक्ति अनुत्तरित है ं...?
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