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बचने वाला तो बचो

इश्क दरिया है
इश्क समंदर भी
पत्नी के लिए गधा
मगर दूसरों के लिए सिकंदर ही
घर में चाय के बदले छाछ पीता हूं
आपके घर पिऊंगा काफी
सुबह उठता हूं झाड़ू खाता हूँ
दोपहर को दारू
शाम को होटल से समोसे खा कर
घर लौटता हूं
सीधा भैंस के घर में सो जाता हूं
रात भर टकटकी लगाए
पड़ा रहता हूँ
कि प्यार की एक बूंद भी गिरे
मगर मेरी वो मेरी मौत बनकर
गालीओं की करती है बारिश
सोचता हूं कल से एक मुहीम चलाऊंगा
जो शादीशुदा है वह दुबारा ना हो
जो नहीं है कुंवारा रहो
शादी का बैंड नहीं बजता है
डंके की चोट है वो
फंसने वाला फंसता है
बचने वाला तो बचो....

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