मन ही मन में कितने दिन
यह प्यार जिला कर रखेंगे
मंजिल तो कभी मिला नहीं
खंडहर में बसेरा बनाएगे
बचपन और लडकपन बीता
यौवन भी आधा पार करेंगे
शरद वसंत बीत गये अब
सावन क्या पकड़ के रखेंगे
हम आंखों ही आंखों में रह गये
गलती अपनी किससे बताएंगे
यह प्यार जिला कर रखेंगे
मंजिल तो कभी मिला नहीं
खंडहर में बसेरा बनाएगे
बचपन और लडकपन बीता
यौवन भी आधा पार करेंगे
शरद वसंत बीत गये अब
सावन क्या पकड़ के रखेंगे
हम आंखों ही आंखों में रह गये
गलती अपनी किससे बताएंगे
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