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नीड़ मत बहा

नीड़ मत बहा ...!

 जख्म ए दिल का हाल वाला

 गीत मत सुना...!

 नीड़ मत बहा...!

 मन ही मन की बात थी

 सरेआम मत सुना ...!

 नीड़ मत बहा ...!

 प्रतिकूल हैं समय अभी

 प्रवास में बिता ...!

 नीड़ मत बहा...!

 जुल्म बढ़ गया है तो

 बेसमेंट में बिता...!

 नीड़ मत बहा...!

 दिल अभी

 बीमार है

 ले लो

 दर्द की दवा ...!

 नीड़ मत बहा


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मेरे अपने हो जाओ

तुम्हारी सांसों के सरगम पर सितारों की तान दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ मेघाच्छन आकाश ना भी होने पर बरसात के फुहारों का अहसास दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ हां... मैं कह रहा हूँ दुनिया के सारे प्रतिबन्ध टूट जाएंगे उस पल हमारे अपने कानून चलेंगे दिन को रात रात को दिन सुबह को शाम सूरज को चांद करते चले जायेंगे हवा हीन मौसम में बसंती बयार मधु ना होने पर अमिय सागर में सरावोर होंगे मगर कब ? जब तुम मेरे अपने हो जाओ

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