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कामना

          काश
          मेरेे तरह सब के दिलों में
          बाहर की भांति
          दिल की गहराइयों में
          प्रेम ठहरने को
          एक विशाल बंगला होता
          जिसमें दरवाजे आंगन के साथ
          बंद शयनकक्ष होता
          जहाँ दो दिल मिल कर
          गुपचुप बातें करते
          उसी भांति चिर काल तक
          करते रहते
          जुदाई
          जिसका नाम ना लेते
         ,यही मेरी कामना!             
             

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तुम्हारी सांसों के सरगम पर सितारों की तान दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ मेघाच्छन आकाश ना भी होने पर बरसात के फुहारों का अहसास दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ हां... मैं कह रहा हूँ दुनिया के सारे प्रतिबन्ध टूट जाएंगे उस पल हमारे अपने कानून चलेंगे दिन को रात रात को दिन सुबह को शाम सूरज को चांद करते चले जायेंगे हवा हीन मौसम में बसंती बयार मधु ना होने पर अमिय सागर में सरावोर होंगे मगर कब ? जब तुम मेरे अपने हो जाओ

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