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अ हटा दो

ब्यक्ति
बैठ जाता है
थक कर 
कभी कभी

पंछी लौट आते
उड़ना छोड़
कभी कभी

मशीन 
बंद कर देती 
काम करना
कभी कभी

हवा 
थोड़ी भी नहीं
बहती 
कभी कभी

सब कुछ
शिथिल
हो जाता है
कभी कभी


यह सब 
तूफान 
आने से पहले की 
खामोशी है

असफलता 
किसी भारी सफलता की 
पूर्व सूचना

असफलता से
अ हटा दो
अंतर 
इतना ही होता है 
कभी कभी




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मेरे अपने हो जाओ

तुम्हारी सांसों के सरगम पर सितारों की तान दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ मेघाच्छन आकाश ना भी होने पर बरसात के फुहारों का अहसास दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ हां... मैं कह रहा हूँ दुनिया के सारे प्रतिबन्ध टूट जाएंगे उस पल हमारे अपने कानून चलेंगे दिन को रात रात को दिन सुबह को शाम सूरज को चांद करते चले जायेंगे हवा हीन मौसम में बसंती बयार मधु ना होने पर अमिय सागर में सरावोर होंगे मगर कब ? जब तुम मेरे अपने हो जाओ

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