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मैं जानना चाहता हूं !

हर आंखें
तुम्हारी तरफ
क्यों उठ जाती हैं?
हर धड़कन
तुम्हारे नाम पर
क्यो धड़कने लगता है?
हर सांसें
तुम्हारे आने पर
क्यों महकने लगती है?
हर दिल में
तुम्हें पाने की
क्यों ललक होती है?
हर प्रश्न
तुम्हारे बारे में
क्यों होने लगता है?
हर उत्तर तुम
सिर्फ तुम्ही क्यों हो?
मैं जानना चाहता हूं!
क्यों मैं भी
हर पल
तुम्हें पाने को
प्रयत्न करता रहता हूं?
क्यों हर बांहें
हर वक्त
तुम्हारे इंतजार में
फैले रहते हैं

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तुम्हारी सांसों के सरगम पर सितारों की तान दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ मेघाच्छन आकाश ना भी होने पर बरसात के फुहारों का अहसास दूँ जब तुम मेरे अपने हो जाओ हां... मैं कह रहा हूँ दुनिया के सारे प्रतिबन्ध टूट जाएंगे उस पल हमारे अपने कानून चलेंगे दिन को रात रात को दिन सुबह को शाम सूरज को चांद करते चले जायेंगे हवा हीन मौसम में बसंती बयार मधु ना होने पर अमिय सागर में सरावोर होंगे मगर कब ? जब तुम मेरे अपने हो जाओ

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