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अंधकार...!

अंधकार ...
पूर्ण अंधकार
मखमली सेज पर
कोई घिसने लगा
झांवा पत्थर
चीख... परी चिड़िया
अपने घोसलों में नहीं
पराये पिंजरों में
होती रही कामना
नये मुखौटों की
मुखौटे की भविष्य की
दूसरी, तीसरी,चौथी और
कई कई रात
एक रात ऐसी आई कि
पूरा जल गया-मखमली सेज
तीन शब्द सुन पायीं-बस
कठमुल्लाओं ने
इन तीन लफ्जों पर
कभी नहीं गोर फर्माया

अब चिड़िया
कुछ नहीं बोलती
दुनिया बोलती रहती है
सिर्फ देखती रहती है
पथराई आँखों से
अंधकार में

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