ऊं ऐं ऊं हे माता! मैहर वाली, मेरी काव्य चेतना जागृत करते रहेंगे
ऊं ऐं ऊंऊ ऐं ऊं अपनी कृपा दृष्टि सदा बनाए रखेंगे !
स्त्री..! रहस्यों से भरी हुई एक ऐसी सुंदरतम प्राणी है जो सचमुच सम्मान का हकदार है।शक्ति उपासना का असली अर्थ शक्ति का सम्मान ही है।और कन्या उत्थान ही जीवन का आधार भी। मेरे ब्लॉग में अधिकांशतः इसी तरह की रचनाएँ आपको मिलेंगे। प्रकृति की यह आश्चर्यजनक एवं संतुलित रचना के नष्ट होने से बचाने का सतत प्रयास करना चाहिए। यही पुरुष का धर्म है।
जय माता दी
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